तेरा होने का इशारा हो गया
जब हमारा इस्तख़ारा हो गया
एक ग़म से हम अभी उभरे कहाँ
'इश्क़ फिर हमको दुबारा हो गया
वो तो साहिल पे भी हो के कब बचे
मैं जहाँ डूबा किनारा हो गया
चंद सांसों के लिए जीते रहे
इस तरह अपना गुज़ारा हो गया
'इश्क़ में माहिर बहुत बनते थे जो
अब की उनको भी ख़सारा हो गया
अब तो चलने को करो तैयारियां
ज़िंदगी से भी इशारा हो गया
तुम को ख़ालिद ले गया जो दार तक
फिर वही तुमको गवारा हो गया
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