teraa hone ka ishaara ho gaya | तेरा होने का इशारा हो गया

  - Khalid Azad

तेरा होने का इशारा हो गया
जब हमारा इस्तख़ारा हो गया

एक ग़म से हम अभी उभरे कहाँ 'इश्क़ फिर हमको दुबारा हो गया

वो तो साहिल पे भी हो के कब बचे
मैं जहाँ डूबा किनारा हो गया

चंद सांसों के लिए जीते रहे
इस तरह अपना गुज़ारा हो गया
'इश्क़ में माहिर बहुत बनते थे जो
अब की उनको भी ख़सारा हो गया

अब तो चलने को करो तैयारियां
ज़िंदगी से भी इशारा हो गया

तुम को ख़ालिद ले गया जो दार तक
फिर वही तुमको गवारा हो गया

  - Khalid Azad

Udas Shayari

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