इश्क़ करते हो मगर ध्यान नहीं रहता है
आपका चाक गिरेबान नहीं रहता है
तुम निकाले तो किसी वक़्त भी जा सकते हो
दिल में मुद्दत कोई मेहमान नहीं रहता है
बात कुछ होगी ज़रूर अब वो बताए न बताए
वो कभी इतना परेशान नहीं रहता है
नब्ज़ चलती है मेरी इन दिनों जैसे तैसे
हाँ मगर ख़ून का दौरान नहीं रहता है
मर्द वो इश्क़ के लायक़ नहीं होता 'कोमल'
वस्ल के वक़्त जो इंसान नहीं रहता है
Read Full