"ख़त"

तुम को ये बताना था
या फिर ये समझाना था
दिल की बस ये चाहत थी
बस तुम पर प्यार लुटाना था
तुम को ये बताना था

था छेड़ना तुम को थोड़ा
थोड़ा तुम्हें सताना था
जो रूठ जाते तुम मुझ से
हाँ मुझ को तुम्हें मनाना था
फिर तुम को गले लगाना था
तुम को ये बताना था

लड़ के भी तुम सोते तो
तुम्हारा सिर सहलाना था
मक़्सद सिर्फ़ एक था
तुम्हारा प्यार कमाना था
सारी दुनिया मिट्टी है
तुम्हारा साथ ख़ज़ाना था
तुम को ये बताना था

मिलने तुम से आना था
या फिर तुम्हें बुलाना था
माँग तुम्हारी भरनी थी
अपना तुम्हें बनाना था
तुम्हारा ही कहलाना था
तुम को ये बताना था

इस जीवन का हर मंज़र
तुम्हारे साथ बिताना था
हर फेरे का हर वा'दा
तुम्हारे साथ निभाना था
मंगलसूत्र इन हाथों से
तुम को ही पहनाना था
तुम को ये बताना था

फ़ासले जितने भी थे
उन को मुझे मिटाना था
उस ख़ुदा से हर जन्म में
तुम्हारा साथ लिखाना था
फिर बारात तुम्हारी चौखट पर
तुम से ही ब्याह रचाना था
तुम को ये बताना था

बिन बोले बस चुपके से
गजरा तुम्हें दिलाना था
बनाता मैं एक दिन खाना
फिर खाना तुम्हें खिलाना था
तुम्हारे हाथों से खाना
मुझ को भी तो खाना था
तुम को ये बताना था

खो दिया तुम को मैं ने
ये दुख अब मुझे मनाना था
डूब जाता आसमान
बस आँसू मुझे बहाना था
फिर लिख दिया मैं ने आँसू
बस इतना मेरा फ़साना था
तुम को ये बताना था

बस
तुम को ये बताना था

— Divya 'Kumar Sahab'

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