क्या भला है क्या बुरा है
जो हुआ अच्छा हुआ है
द्वारिका तक आते आते
मित्र अब आना हुआ है
तुम ने मुझ को कब पुकारा
बन्दा तो कब से खड़ा है
वक़्त का तेवर जो बदला
बोल क्या मेरी ख़ता है
बे-सबब तुम रूठ बैठे
ये नहीं अच्छा लगा है
मुझ को मेरा ग़म मुबारक
आप को क्यूँ कर गिला है
आप भी रोते हैं साहब
रंज दिल में क्या छिपा है
मौत आख़िर काम आई
सर से सब झंझट हटा है
— Kumar Aryan















