
ख़ुशी मेरी उसे कब यार ये तो रास आई है
कहाँ नादान लड़की अब मिरे तो पास आई है
मिरे तो ज़ेहन से यादें निकलती क्यूँ नहीं उस की
मगर क्यूँ याद रहने साथ बारह-मास आई है
— Lalit Mohan Joshi
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