हसीं सूरत, फ़रेबी इन अदाओं पे नहीं मरतेमिरे जैसे, तिरी जैसी बलाओं पे नहीं मरतेसमझ लीजे यही है फ़र्क़ मुझमें और रक़ीबों मेंतिरी पायल पे मरते हैं वो पावँ पे नहीं मरते— Vijay Anand Mahir