भूल जाने में जिन को ज़माने लगे

अब की बारिश में वो याद आने लगे

ये गया है फ़क़त एक ही रास्ता
फिर यहीं दिल किसी भी बहाने लगे

जब कभी भी सुनाई दिली दास्ताँ
लोग ज़ख़्मों को अपने दिखाने लगे

इक नया घर बनाने की ख़्वाहिश में अब
हम पुरानी दिवारें गिराने लगे

आने जाने की जिन की न रहती ख़बर
इश्क़ में वो ही मौसम सुहाने लगे

— Manish Yadav

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Mausam Shayari

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