फॅंसूँगा अब ज़रूर उस के फॅंसाने में
बिठाये उस ने साँप अब खाने खाने में
उसे गुमराह कर दूँगा मुहब्बत में
कभी आ जाए वो मेरे बहाने में
तुम अपना रास्ता बदलो नहीं तो फिर
मैं हूँ बद-नाम वैसे ही ज़माने में
— Manish Yadav
बिठाये उस ने साँप अब खाने खाने में
उसे गुमराह कर दूँगा मुहब्बत में
कभी आ जाए वो मेरे बहाने में
तुम अपना रास्ता बदलो नहीं तो फिर
मैं हूँ बद-नाम वैसे ही ज़माने में
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