
नफ़रती ये लोग देखो हाथ अपने मल रहे हैं
इश्क़ की ये राह कब से ये दिवाने चल रहे हैं
तय हुआ था बस्तियाँ ये होंगी रौशन रौशनी से
पर चराग़ों की जगह अब आशियाने जल रहे हैं
— Manish Yadav
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