ख़्वाब फिर तू नए सफ़र के देख

पहले हालात अपने घर के देख

इक नज़र मुझ को आँख भर के देख
अपने दीवाने को तो मर के देख

ये ज़मीं वो ज़मीं नहीं है कि तू
आसमाँ से कभी उतर के देख

आज उस ने भी ज़ुल्फ़ें खोली हैं
आज तू भी ज़रा सँवर के देख

क्या ख़बर लौट आए अगले पल
थोड़ा और इंतिज़ार कर के देख

कितनी उजलत से चलती है दुनिया
बैठ जा और ज़रा ठहर के देख

मैं वही हूँ हाँ जो तिरा था कभी
तू ज़रा मुझ को ग़ौर कर के देख

— MIR SHAHRYAAR

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