ज़माने से पड़े सूखे गुलाब देखोगीकोई किताब पढ़ोगी तो याद आऊँगाकभी मोहब्बतों की उलझी उलझी राहों परजो तन्हा तन्हा चलोगी तो याद आऊँगा— MIR SHAHRYAAR