नज़र से नज़र की मिली जब कहानी
सुनाते रहे आँसुओं की ज़बानी
सुकूँ है तिरी बात में इस क़दर क्यूँ
कि लगती है जैसे कोई इक निशानी
न तू पास फिर भी है महसूस हर दम
तिरी याद मेरी हुई मेहरबानी
चलो छोड़ दें ये गिला वक़्त से अब
कि मिलती नहीं है वफ़ा रातपानी
मैं चुप हूँ मगर ये तिरी याद बोले
है ख़ामोशियों में भी इक सुर बयानी
— Meem Mohammed















