
कितने नेता हैं जिन्होंने रैली कर कर नारे बेचे
कुछ नहीं सूझा उन्हें जब तो उन्होंने वादे बेचे
ये हमारा देश है जो क्या यहाँ बिकता नहीं है
एक ने तो क़स
में खा खा झूट बेचे जुमले बेचे
— Mohit Subran
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