मेरी आँखों को ग़िज़ा दो
अपना चेहरा तुम दिखा दो
कब तलक इतनी ख़मोशी
जो भी दिल में है बता दो
जानते हैं हम ग़लत थे
जो हुआ वो सब भुला दो
हम अगर अब भी बुरे हैं
तो हमें फिर तुम सज़ा दो
— Mohsin Ahmad Khan
अपना चेहरा तुम दिखा दो
कब तलक इतनी ख़मोशी
जो भी दिल में है बता दो
जानते हैं हम ग़लत थे
जो हुआ वो सब भुला दो
हम अगर अब भी बुरे हैं
तो हमें फिर तुम सज़ा दो
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