नज़र का नज़र को भुलाना वही है
नज़र का अभी पर चुराना वही है
तुम्हें प्यार करना,विरह को बुलावा
विरह से स्वयं को कमाना वही है
अलग जो हुए हम न हम हैं रहे हम
दिवानी मगर ये दिवाना वही है
भले ही भुलाना कदम है तुम्हारा
मगर प्यार मेरा पुराना वही है
मुझे सब तुम्हारा सदा पूछते हैं
अभी तक तुम्हें पर छुपाना वही है
— Kavi Naman bharat















