ये दुक्ख अलग है कि उससे मैं दूर हो रहा हूँ - Tehzeeb Hafi

ये दुक्ख अलग है कि उससे मैं दूर हो रहा हूँ
ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है

तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें
ये तेरा ग़म है जो मुझको मशहूर कर रहा है

Tehzeeb Hafi
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Hijr Shayari

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