jab se hue hain door kisi aadmi se ham | जब से हुए हैं दूर किसी आदमी से हम

  - Mukesh Guniwal "MAhir"
जबसेहुएहैंदूरकिसीआदमीसेहम
हमसेख़फ़ाहैज़िन्दगीऔरज़िन्दगीसेहम
येलोगउनकेनामसेक्याक्याकररहे
मिलकरकहेंगेरामसेमाँजानकीसेहम
अबऔरइश्क़कीहमेंआदतनहींरही
जाथकचुकेहैंयारतेरीआशिक़ीसेहम
जैसेकिपूछलेगाकोईइम्तिहानमें
सुनतेथेउसकीबातयूँँसंजीदगीसेहम
अबदिलठिकानेपरहैयेज़ेहनहीदुरुस्त
पगलागएहैंलौटकरउसकीगलीसेहम
इकरोज़यूँँहुआकिसभीशिकवेभूलकर
फिरगएथेदोस्तीमेंदुश्मनीसेहम
दोनावपरसवारथेसोडूबनाहीथा
पारइकसेहोसकेहुएदूसरीसेहम
पंद्रहबरसकेबा'दभीबदलातोकुछनहीं
उम्मीदक्याहीरक्खेंअबइसनौकरीसेहम
छुपछुपकेमिलरहाथातूराधासेख़्वाबमें
चुगलीकरेंगेकृष्णतिरीरुक्मिणीसेहम
तूबावफ़ारहेयारहेहमसेेबे-वफ़ा
बढ़करतोआजभीनहींतेरीख़ुशीसेहम
आँगनकेजोदरख़्तथेसारेबबूलथे
ता-उम्रजूझतेरहेगुलकीकमीसेहम
हरतीरथाहमारेहीतरकशकाइसलिए
सबवारसहगएबड़ीशाइस्तगीसेहम
दुखसोचकरबतामकींपत्थरहैंनींवके
मंसबहीछोड़देंज़रासीनमीसेहम
  - Mukesh Guniwal "MAhir"
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