कर्ज़ माँ का न हम सेे अदा हो कभीफिर भी बदले में माँ को ह़ँसा दो कभीइस के ज़िंदा ही रहने से घर-बार हैसाया माँ का ना सर से जुदा हो कभी— Muneer shehryaar