आँसुओं से ये पलकें भी तर हो गईरोते रोते मुझे रात भर हो गईआईना देखने से वो मानी नहींउस को अपनी ही ख़ुद की नज़र हो गईहूरें परियाँ भी करती है उस का अदबख़ूब-सूरत वो अब किस क़दर हो गई— Muneer shehryaar