ये मोहब्बत में उसकी भलाई तो है
मेरे हाथों में उसकी कलाई तो है
कह रही थी जो तुम सेे मोहब्बत नहीं
मेरी महफ़िल में लेकिन वो आई तो है
लोग तारीफ़ करते हैं जिसकी यहाँ
उस
में थोड़ी मगर बे-वफ़ाई तो है
नींद आती नहीं है यही सोच कर
इस महीने में उसकी सगाई तो है
कौन कहता है उसको मोहब्बत नहीं
वो मुझे देख कर मुस्कुराई तो है
कोई उसकी बुराई न मुझ सेे करे
चाहे जैसा है वो मेरा भाई तो है
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