ये मोहब्बत में उस की भलाई तो है

मेरे हाथों में उस की कलाई तो है

कह रही थी जो तुम से मोहब्बत नहीं
मेरी महफ़िल में लेकिन वो आई तो है

लोग तारीफ़ करते हैं जिस की यहाँ
उस
में थोड़ी मगर बे-वफ़ाई तो है

नींद आती नहीं है यही सोच कर
इस महीने में उस की सगाई तो है

कौन कहता है उस को मोहब्बत नहीं
वो मुझे देख कर मुस्कुराई तो है

कोई उस की बुराई न मुझ से करे
चाहे जैसा है वो मेरा भाई तो है

— Muneer shehryaar

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