जिस से मिलता था खुले दिल से मैं बचपन की तरह
देखता वो है मुझे आज भी दुश्मन की तरह
शर्म को ताक पे रक्खा है यहाँँ लोगों ने
ये मेरा शहर भी हो जाएगा लंदन की तरह
उसके ऊपर तो मुझे कोई भरोसा ही नहीं
दोस्त मेरा तो बदल जाता है सीजन की तरह
ऐसा लगता है वो पहने है कलाई में मुझे
वो घुमाती है मुझे रोज़ ही कंगन की तरह
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