वो तो आएँगे बस इतना ही बता देता हूँ

दिल को बहला के मैं रातों को सुला देता हूँ

याद आती है मेरे दोस्त की जब भी मुझ को
उस की तस्वीर मैं सीने से लगा लेता हूँ

मैं छुपाता ही नहीं हूँ ये मोहब्बत अपनी
दिल के ज़ख़्मों को जमाने को दिखा देता हूँ

आप की याद मुझे आती है जब भी जाना
अपनी आँखों से मैं अश्कों को बहा देता हू्ँ

तू मेरी जान है तू ही तो है चाहत मेरी
तेरी हर बात को मैं हँस के भुला देता हूँ

मेरी हस्ती हुई आँखों को रुलाने वाले
तुझ को मालूम है कितनी मैं दुआ देता हूँ

रोना होता है अकेले में मुझे जब भी मुनीर
अपने कमरे के चिराग़ों को बुझा देता हूँ

— Muneer shehryaar

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