जल्द आएगी वो रुत जब उन सेे मिलने वाले होंगे
तब तलक लेकिन इन आँखों में हमारी छाले होंगे
लौट भी आए कभी वो तोड़ कर सारी हदों को
ग़ालिबन मेरी तरह उस ने भी वादे पाले होंगे
तुम भी हो जाओगे इक दिन तो गुरेज़ाँ ख़ुद से लेकिन
हम तुम्हारे चाहने वालों में अव्वल वाले होंगे
ख़्वाब जो देखे थे हम ने टूट उन के जाने के बा'द
ग़म में हिम्मत कर के उस ने फ़ैसले सब टाले होंगे
हम छुपा लेते हैं अपनी दास्ताँ नम आँखों के साथ
ज़िक्र पर उलफ़त के उन के भी लबों पर ताले होंगे
— Muntazir shrey















