उस लडकी को कुछ समझाना
दीवारों पे सर टकराना
वस्ल की सुब्ह न हिज्र की रातें
लगा हुआ है आना जाना
याद आते हैं माज़ी के दिन
वो इक दूजे से बतलाना
तुम से इश्क़ नहीं है मुझ को
दिल पे पत्थर रख के कहा ना
झूठ कहा था झूठ सुना था
और कहो ना और सुना ना
दरिया दरिया प्यास बुझाओ
लेकिन लौट के फिर मत आना
प्यार किया है और किसी से
और किसी से प्यार निभाना
तर्क-ए-त'अल्लुक़ करने को वो
ढूॅंढ रही थी एक बहाना
इक दिन ऑंसू अता किए थे
रोज़ हुमारा शुक्र मनाना
क़स
में खाना छोड़ चुकी हूँ
क़स
में खा खा के बतलाना
याद न करना मुझ को चाहे
लेकिन मुझ को भूल न जाना















