"आख़िरी सर्दी"

सब तबाह-ओ-बर्बाद हो जाएगा
ये सितम है कि
इक दिन
कोई तुम पर
मरते-मरते मर जाएगा

तुम से था वो जो
सुरख़ाब चेहरा
कि जिस पे तुम मरती थीं
बेनूर हो जाएगा

मेंरे चश्मों को
बीनाई जो तुम ने
की थी अता
उस को देखना
नमी लग जाएगी
ज़ंग खा जाएगा

एक दिल जिस को
बरसों धड़काया तुम ने
बेचैन-ओ-बेक़रार रखा
वो भी जान क़रार पा जाएगा

साँसें
जो महकती रहीं हैं अभी तलक
सो उन को भी
सीने का एक ज़ख़्म खा जाएगा

जिस जिस्म को
गर्मी-ए-आग़ोश में
कितनी सर्दियां तुम ने रखा था
इस सर्दी
शायद
सर्द हो जाएगा
असर खो जाएगा

और आख़िरश एक लड़का
जिस से तुम को निस्बत थी
जिस को तुम से निस्बत है
हिज़्र तुम्हारा खा जाएगा
मर जाएगा

एक लड़का
बिछड़ कर तुम से
इस सर्दी
सुनो मुझ को ऐसा लगता है
मर जाएगा

— Navneet Vatsal Sahil

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