हर शख़्स अगर तर्ज़ का व्यापार करेगा
क्या हश्र हमारा यहाँ बाज़ार करेगा
किस बात पे इख़राक़ लगेंगे हमीं हम से
किस बात पे तू मौत को तैयार करेगा
महबूब की वो लाश भी जलती रही अब तक
अब कौन भला आग से इनकार करेगा
उस तख़्त की नायाब चमक दूर से देखो
मत हाथ लगाना उसे, बीमार करेगा
नश्तर ये भले आज तिरी खाल में उतरे
कल जिस्म को ही चीर के दो-चार करेगा
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Nikhil Tiwari 'Nazeel'
our suggestion based on Nikhil Tiwari 'Nazeel'
As you were reading Aag Shayari Shayari