ज़िंदगी का मसअला हल हो चुका था
मेरे सर पर उस का आँचल हो चुका था
यूँ हमारे साथ में छल हो चुका था
सारा झूठा सब्र का फल हो चुका था
दिल के रखते ही मैं इस में धस गया हूँ
प्यार उस का एक दलदल हो चुका था
जो तुम्हारे साथ में अब हो रहा है
वो हमारे साथ में कल हो चुका था
तुम ही मेरे इश्क़ के क़ाबिल नहीं थी
मैं तो लग-भग पूरा पागल हो चुका था
वो घटा काली कहीं पर भी न बरसी
मैं मोहब्बत में धरातल हो चुका था
तब किया सीने पे मेरे वार उस ने
दिल 'मिलन' जिस वक़्त मख़मल हो चुका था
— Milan Gautam















