बढ़ता सरदर्द रहा दिल में
जब तक शब-गर्द रहा दिल में
था पाक तरफ़ से मेरे तो
उस के ही गर्द रहा दिल में
उस का था हो के रहना बस
ये बाकी कर्द रहा दिल में
गर्मी थी तुझ से बा'द तिरे
मौसम भी सर्द रहा दिल में
पत्थर पर सर मारा मैं ने
भी बस ये दर्द रहा दिल में
दुश्मन ही मेरे दिल का है
बनके हमदर्द रहा दिल में
जो गुज़री हम पर ही गुज़री
पंकज बे-दर्द रहा दिल में
— Pankaj murenvi















