"आशियाना-ए-दिल"
प्रेम के गीत अपने मैं, लिखता रहूँ
मेरे गीतों को तुम, गुनगुनाया करो
मेरा दिल भी तेरा, अबसे घर बन चुका
इस नए घर में तुम, आया जाया करो
— Parmod writes
प्रेम के गीत अपने मैं, लिखता रहूँ
मेरे गीतों को तुम, गुनगुनाया करो
मेरा दिल भी तेरा, अबसे घर बन चुका
इस नए घर में तुम, आया जाया करो
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