हो कोई भुलाना तो सजा मुझ को
बेहद ही दिवाना दिल मिला मुझ को
जो साथ चले कोई तो चल दूँ मैं
तन्हा यहाँ चलना अब क़ज़ा मुझ को
कब का ही बिछड़ गया था वो मुझ से
एहसास बिछड़ के ये हुआ मुझ को
इक शख़्स है खोया मैं ने ऐसे भी
फिर उस
में भी वो नहीं मिला मुझ को
ऐ इश्क़ मैं तुझ को पा नहीं सकता
टूटे किसी गुल की बद-दुआ मुझ को
— Chetan Verma















