
धोखे के बा'द विश्वास पहले सा दोबारा नहीं रहता
घर की दहलीज़ पे है बंजारा बंजारा नहीं रहता
वो ही इश्क़ मिरी जाँ मैं तुझ से अब दोहराऊँ कैसे
टूटा जो एक बार तारा तो फिर तारा नहीं रहता
— Chetan Verma
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