हमें मिल रहे आज पैग़ाम क्या क्या
दिए जा रहे हैं वो इल्ज़ाम क्या क्या
किसी शाह की जो उछाली है इज़्ज़त
बताओ कहेगी ये आवाम क्या क्या
वफ़ा जो निभाई तो कहते हैं मुझ को
ये जाहिल, ये पागल, ये दुश्नाम क्या क्या
हमें बाँट कर वो हमें कह रहे हैं
ये हिन्दू, ये ईसा, ये इस्लाम क्या क्या
ये शोहरत, ये रुतबा, ये जागीर, ये घर
यहाँ हो गया आज नीलाम क्या क्या
— Piyush Mishra 'Aab'















