पड़े बीमार चारा-गर सभी, बोलो दवा क्या है
न जाने क्या हुआ है, शहर की आब-ओ-हवा क्या है
मुझे कुछ और कहता है, उसे कुछ और कहता है
उगलता फिर रहा है ज़हर, बनता ख़ुश-नवा क्या है
हमें मालूम था मरना हमें है एक ही पल में
सज़ा-ए-मौत में फिर ऐ ख़ुदा ये इल्तवा क्या है
बड़ा दिलदार है तू दर्द का अम्बार देता है
किसी का हम नवा हो तू, कोई फिर बे-नवा क्या है
जिगर लब रूह सब मेरा तो फिर क्या हक़ जताता है
हमें सारा ही ले जा तू ये आधा ये सवा क्या है
— Piyush Mishra 'Aab'















