बहाने ही बहाने आप को हम याद करते हैं
मगर ये आप हैं, हरदम हमें बर्बाद करते हैं
किसी सूरत किसी सीरत किसी हालत किसी वहदत
यही तस्वीर पकड़े हैं, इसे ही शाद करते हैं
हमें तो ग़म सताता है, हमें यादें रुलाती हैं
हमें जब याद आती है, यही रूदाद करते हैं
किसी से क्या करें शिकवा, किसी से क्या कहें वहशत
हमारा दिल पिघलता है, इसे फौ़लाद करते हैं
यही करते रहेंगे 'आब' तो कैसे बचेंगे हम
यही क़िस्सा हमारा है, यही इरशाद करते हैं
— Piyush Mishra 'Aab'















