हुस्न निखरे नहीं उतरता रहे
ज़िंदगी भर भले वो सँवरता रहे
छोड़ कर वो गया तो ख़ुदा ये करे
दूसरा इश्क़ उस को अखरता रहे
वो दिखा ही नहीं अब बहुत दिन हुए
लौट भी आ ये मौसम निखरता रहे
राम के देश में चाहते हैं सभी
धर्म जीता रहे द्वेष मरता रहे
ऐ ख़ुदा सिर्फ़ इतना हमें चाहिए
काम चलता रहे पेट भरता रहे
— Piyush Mishra 'Aab'















