अब भला अफ़सोस क्या हो काम कर जाने के बाद
काँच तो जुड़ता नहीं फिर, यूँँ बिखर जाने के बाद
आग से पानी से हमको वो डराते फिर रहे
डर नहीं लगता है जानो, ख़ूब डर जाने के बाद
दोस्त मेरा वादियों को एक टक था देखता
वो इधर आया नहीं, इक दिन उधर जाने के बाद
दिल के अक़्ल-ओ-होश के होने का क्या है फ़ायदा
दुश्मनों को दोस्त समझे, तन सँवर जाने के बाद
ग़म मैं अपना देखता हूँ चाँद छिप जाने के बाद
चाँद तारे देखता हूँ दिन गुज़र जाने के बाद
शायरी तो खूब करते हैं यहाँ पे लोग पर
शायरी में नाम तो, होता है मर जाने के बाद
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Piyush Mishra 'Aab'
our suggestion based on Piyush Mishra 'Aab'
As you were reading Dard Shayari Shayari