अपनी पलकें कभी तुम भिगोना नहीं
याद आए मिरी गर तो रोना नहीं
मैं किसी को दुबारा नहीं मिलता हूँ
हो सके तो कभी मुझ को खोना नहीं
आरज़ू बस यही तुम से है इक मिरी
इक सिवा इस के कोई तमन्ना नहीं
इक दफ़ा तुम मिरी हो गई जो अगर
फिर कभी तुम किसी की भी होना नहीं
कितनी आसानी से कह दिया उस ने ये
दरमियाँ अपने कोई भी रिश्ता नहीं
लाओ वापस करो तुम मिरा दिल मुझे
मेरा दिल है ये कोई खिलौना नहीं
इस से बाहर न गर आ सको तुम 'अमन'
प्यार में ख़ुद को इतना डुबोना नहीं
— Avijit Aman















