"तेरा ख़याल"

तू नहीं है फिर भी हर साँस में बसा है
जैसे हवा में बसी हो कोई ख़ुशबू
जो दिखती नहीं पर महसूस होती है
हर धड़कन में हर लम्हे में

तेरी यादें जैसे धीमी बारिश की बूँदें
जो भिगाती हैं पर नज़र नहीं आतीं
हर क़दम पर तेरा एहसास साथ चलता है
जैसे परछाईं जो हर मोड़ पर
इंतिज़ार करती है

आसमान में उड़ते बादलों में
तेरा चेहरा नज़र आता है मुझे
तेरी आँखों की गहराई में
मैं खो जाता हूँ
जैसे समुंदर की लहरें किनारे को छू कर लौटती हैं
वैसे ही मेरे ख़्वाब तेरे पास से होकर गुज़रते हैं

तू नहीं है फिर भी मैं तुझ से दूर नहीं
तेरी ख़ामोशी में तेरे अल्फ़ाज़ ढूँढ़ता हूँ
तेरी हँसी में वो जादू है
जो हर दर्द को मिटा देती है

और मैं
तेरे बिना भी तेरे साथ जीता हूँ

— Prikshit Bhardwaj 'aairf'

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