मैं ने वो ख़ौफ़ के मंज़र भी देखे हैंअपनों के हाथ में ख़ंजर भी देखे हैंजिन ज़मीनों ने दौलत हर घड़ी बख़्शीखेत ऐसे कभी बंजर भी देखे हैं— Prikshit Bhardwaj 'aairf'