अहद-ओ-पैमाँ निभाता पागल था
आदमी पहले कितना पागल था
एक झूठे ने ख़ुदकुशी कर ली
कह न पाया ज़माना पागल था
सारी ही दुनिया ने हवस को चुना
एक मैं ही अकेला पागल था
यहाँ सब जौन के दिवाने हैं
जौन भी अच्छा ख़ासा पागल था
प्यार में तेरे क्या ख़बर तुझको
इक समझदार कितना पागल था
जहाँ नफ़रत के चरखे चलते वहाँ
प्रीत बुनकर तू बनता पागल था
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