घड़ी भर चैन से तो बैठ, क्यूँँ हर बार रोता है
कहा तो कहता है ये इश्क़ है, ऐसे ही होता है
गुज़ार आया शब-ए-वस्ल-ए-मोहब्बत बातों बातों में
सुब्ह मालूम जाना इश्क़ मतलब जिस्म होता है
वो ज़िंदा हो तो पागल, मरने पर आसेब बनता है
भला कब तक असीर ए इश्क़ गहरी नींद सोता है
— Prit















