तुम्हारी याद से निकली उदासी
सभी पहलू से है अच्छी उदासी
जहाँ पहले कभी ख़ुशियाँ रखी थी
वहीं पे आज है रक्खी उदासी
किसी ने दिल के अंदर है छिपाई
किसी ने चेहरे पे रक्खी उदासी
उदासी ने भी आख़िर तंग आ कर
ये मुझ से कह दिया इतनी उदासी
जहाँ में सब सेे गहरा है समंदर
समंदर से भी है गहरी उदासी
ख़ुशी ने पाँव तक समटे हुए हैं
बहुत है दूर तक फैली उदासी
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