समझो मेरी जान बहुत है
नफ़रत से नुक़सान बहुत है
जीना मुश्किल हो सकता है
मरना तो आसान बहुत है
तुम जो मेरी ख़ातिर करते
सच में मेरी जान बहुत है
वो ही बेहद मुश्किल होता
लगता जो आसान बहुत है
शैतानी दुनिया की ख़ातिर
हम सेा इक इंसान बहुत है
हम तो अब भी सच कहते हैं
हम
में अब भी जान बहुत है
मन से उसको पढ़कर देखो
वो लड़की आसान बहुत है
इस
में कुछ भी ख़ास नहीं है
ये दुनिया बेजान बहुत है
जीना सीखो मेरेे भाई
मरने से नुक़सान बहुत है
वो तुमपे मरती है मधुकर
जिस सेे तू अंजान बहुत है
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