padha likha ho jo aashiq use sahoolat hai | पढ़ा लिखा हो जो आशिक़ उसे सहूलत है

  - Raj

पढ़ा लिखा हो जो आशिक़ उसे सहूलत है
लुग़त में भी लिखा है लत के पहले उल्फ़त है

मैं क्यूँँ करूँँ गिला हिजरत से तेरे मेरी जाँ
ये मेरे पास तिरी आख़िरी अमानत है

बग़ैर पैर के तस्वीर में बनाऊँ तुम्हें
कि छोड़ के चले जाने की तुमको आदत है

अगरचे झूठी क़सम खाने से कोई मरता
तुम्हारे हिज्र की सौ मुझको तुम सेे नफ़रत है

मैं फ़ातिहा मिरी ख़ुशियों का पढ़ लूँ क्या मिरे दोस्त
या तुमको मुझ सेे अभी भी कोई शिकायत है

तिरा नक़ाब मिरे सामने कभी तो खुले
जो अब्र सागरों पे बरसे उनपे लानत है


तू आँसू पोछ गरेबाँ तो छोड़ बात तो मान

मैं अपनी बात भी रख लूँ अगर इजाज़त है

  - Raj

Tasweer Shayari

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