अगर ये दुख नहीं बनता तो ये दरिया नहीं बनता
हमारा फिर किसी भी बात पर रोना नहीं बनता
अगर वो कहती तुम रुक जाओ तो बेशक मैं रुक जाता
मुझे रोका नहीं उस ने मेरा रुकना नहीं बनता
चलो तुम से कहें देता हूँ कितना प्यार है लेकिन
मुझे ये लगता है तुम से ये भी कहना नहीं बनता
यहाँ 'उम्रें गुज़र जाती हैं इज़्ज़त को कमाने में
मियाँ दो चार दिन में कोई भी अच्छा नहीं बनता
समुंदर तू मुझे इक क़तरा दे क्यूँ दरिया देता है
मेरा हिस्सा तो बनता है मगर इतना नहीं बनता
— Raj Sengar















