मन के भीतर चोर छुपा है
या'नी इक कमज़ोर छुपा है
उस अँधियारे से डरते हो
जिस के पीछे भोर छुपा है
ख़ामोशी से मैं ने पूछा
अंदर कितना शोर छुपा है
बरसे बिन मौसम के बादल
शायद कोई मोर छुपा है
मैं ने मन में ख़ूब टटोला
रब जाने किस ओर छुपा है
— Ranjan Kumar Barnwal















