Ranjan Kumar Barnwal

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@Ranjan_rkbarnwal

Ranjan Kumar Barnwal shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Ranjan Kumar Barnwal's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
  • Ghazal

Sher

ज़मीं से चाँद वापस जा चुका है यहाँ पे कोई आशिक़ रो रहा है — Ranjan Kumar Barnwal
मैं इस लिए भी कुछ नहीं कहता उसे ये ज़िंदगी रहती नहीं तो इश्क़ क्या — Ranjan Kumar Barnwal
इश्क़ में गर यार रिश्ता टूटता है या'नी अपनी माँ से बच्चा रूठता है — Ranjan Kumar Barnwal
नींद मेरी उड़ चुकी है ख़्वाब तेरे देखता हूँ — Ranjan Kumar Barnwal
इश्क़ में सब कुछ हक़ीक़त मैं भी क्या क्या सोचता हूँ — Ranjan Kumar Barnwal
फ़रेबी लोग थे सारे मिरे अपने पराए सब यहाँ अहमक़ बना हूँ मैं भरोसा कर के लोगों पे — Ranjan Kumar Barnwal
उसे देख पतझड़ में मैं ने ये सोचा कि शाख़ों में कोई कली आ रही है — Ranjan Kumar Barnwal
मुझे जिस शख़्स ने तन्हा किया है उसे ही ढूँढती है ये नज़र क्यूँ — Ranjan Kumar Barnwal
मैं चाहूँ तो अंबर के तारे गिन लूँ उन के तन के तिल गिन पाना मुश्किल है — Ranjan Kumar Barnwal
मुहब्बत से किनारा कर रहा हूँ ये मैं कैसे गुज़ारा कर रहा हूँ — Ranjan Kumar Barnwal
ग़मों में डूब कर ये सोचता हूँ मिली ख़ुशियाँ जहाँ पे ग़म वहीं क्यूँ — Ranjan Kumar Barnwal
दुनिया में ये हरदिन हर-पल होता है चाहत में ही आशिक़ सब कुछ खोता है — Ranjan Kumar Barnwal
दुनिया में ये हर दिन हर पल होता है चाहत में ही आशिक़ सब कुछ खोता है — Ranjan Kumar Barnwal
प्यास हो चाहत की तो फिर सुन मिरी जाँ उस समुंदर का गला भी सूखता है — Ranjan Kumar Barnwal
मुझे क्यूँ इश्क़ से मतलब रहेगा मुझे इस इश्क़ ने तन्हा किया है — Ranjan Kumar Barnwal
अभी जो धूप में तपती ज़मीं है उसे है भीगनी अगले सहर ही — Ranjan Kumar Barnwal
यहीं पर बग़ल में हो लेकिन बहुत दूर बैठे हो मुझ सेे — Ranjan Kumar Barnwal
उस ने माँगा था बस छोटा सा पत्थर मैं जा कर सागर से मोती ले आया — Ranjan Kumar Barnwal
उन्हें जो बात बस करनी थी हम सेे हमीं से अब छुपाई जा रही है — Ranjan Kumar Barnwal

Ghazal

बता दे ज़रा तू परेशान है क्या किसी बात पर रूह हैरान है क्या ज़रा मुश्किलें जो बढ़ाई गई हैं यहाँ से वहाँ तक कहीं ध्यान है क्या ग़लत देख नज़रें चुराना ग़लत है ग़लत देखने में भला शान है क्या अभी तो ज़रा सी लगी हाथ में है बता भी ज़रा दे तुझे ज्ञान है क्या गली से न यूँँ तुम गुज़रना भले ही मगर देख लो राह सुनसान है क्या किए जा रहे हो भला शोर क्यूँ तुम बता मुश्किलों में लगे प्राण है क्या उधर है न कृष्णा जिधर है न राधा भुला के मिला दे वो पहचान है क्या बजा बाँसुरी इक दफ़ा प्रेम से फिर करे राधिका देख गुणगान है क्या मिला दे यहाँ प्रेम से प्रेम को जो लगे लोग कहने कि भगवान है क्या — Ranjan Kumar Barnwal