ग़ज़ल की है ज़मीं मुखड़ा तुम्हारा
कहीं हो तुम कहीं मुखड़ा तुम्हारा
ये आँखें मूँद भी लूँ पर जिगर से
कभी हटता नहीं मुखड़ा तुम्हारा
भरी महफ़िल की रौनक़ बस तुम्हीं हो
यहाँ सब से हसीं मुखड़ा तुम्हारा
हमेशा साथ रहते हो मिरे तुम
है मेरा हमनशीं मुखड़ा तुम्हारा
मुझे जब-जब मुहब्बत याद आई
कहीं थी माँ कहीं मुखड़ा तुम्हारा
— Ranjan Kumar Barnwal















