हमें है ख़बर वो किधर जा रहे हैं
भरोसा है लेकिन कि घर जा रहे हैं
हमें था ये लगता वो हैं ख़ानदानी
वही बस वही हैं जिधर जा रहे हैं।
जलाया था हम ने मुहब्बत में उन को
सनम हद से आगे गुज़र जा रहे हैं
बहुत दिन हुए हैं जो पानी दिए थे
वो फूलों को देखो वो मर जा रहे हैं
हक़ीक़त सुनाऊँ या क़िस्सा पुराना
वो वा'दा भी कर के मुकर जा रहे हैं
— Ranjan Kumar Barnwal















