बता दे ज़रा तू परेशान है क्या

किसी बात पर रूह हैरान है क्या

ज़रा मुश्किलें जो बढ़ाई गई हैं
यहाँ से वहाँ तक कहीं ध्यान है क्या

ग़लत देख नज़रें चुराना ग़लत है
ग़लत देखने में भला शान है क्या

अभी तो ज़रा सी लगी हाथ में है
बता भी ज़रा दे तुझे ज्ञान है क्या

गली से न यूँ तुम गुज़रना भले ही
मगर देख लो राह सुनसान है क्या

किए जा रहे हो भला शोर क्यूँ तुम
बता मुश्किलों में लगे प्राण है क्या

उधर है न कृष्णा जिधर है न राधा
भुला के मिला दे वो पहचान है क्या

बजा बाँसुरी इक दफ़ा प्रेम से फिर
करे राधिका देख गुणगान है क्या

मिला दे यहाँ प्रेम से प्रेम को जो
लगे लोग कहने कि भगवान है क्या

— Ranjan Kumar Barnwal

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